रक्षा बंधन
Last Updated : 2017-09-13 2:18:22 PM

भारत त्यौहारों का देश है, जहां अलग-अलग तरह के त्यौहारों को मानते है | भारत में हर त्यौहार का अपना ही एक अलग महत्व है | हिन्दू धर्म में भाई बहन द्वारा मनाया जाने वाला सबसे पवित्र रक्षाबंधन का त्यौहार है | जो की हर साल श्रावण (सावन) मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है | रक्षाबंधन को श्रावण (सावन) मास में बनाने की वजह से इसे श्रावणी (सावनी) या सलोनो भी कहते है | रक्षाबंधन में राखी और रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्व होता है | राखी कच्चे सूत जैसे सस्ती वस्तु से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे तथा सोने-चांदी जैसे महंगी वस्तुओ की भी होती है | इस दिन बहन अपने छोटे और बड़े भाई को राखी बांधती है और उनके लिए लम्बी आयु की दुआ करती है | इस त्यौहार को पूरे विश्व में मनाया जाता है, इसे अधिकतर हिंदू धर्म के लोग बड़े ही धूमधाम से मानते है |

त्यौहार मनाने की विधि :-

इस दिन बहने अपने घर को साफ करती है और पवित्र करके पुजा की थाली सजती है | थाली में राखी के साथ रोली या हल्दी, चावल, दीपक, मिठाइयाँ होती है | बहने आपने भाई को जहाँ पर बिठाती है वहां रंगोली बनाती है और उनको ऊँचा स्थान बैठने के लिए देती है | इस दिन सभी बहने अपने भाइयों के माथे पर टिका करती है और चवाल को टिके के ऊपर लगाती है फिर सीर पर चवाल को छिङकती है, उनके दाहिनी कलाई पर राखी बाँधकर उनकी आरती उतरती है | इस दिन सभी बहने अपने भाइयों के ऊपर से पैसे को न्यौछावर (सर के ऊपर वारना) करके उन्हे गरीबों में बांट देती है |इसके बाद भाई अपनी बहनो को उपहार या धन देते है और भाई अपनी बहन की लम्बी उम्र की मनोकामना करता है | इस दिन जब तक बहन अपने भाइयों को राखी बाँध नहीं लेती है तब तक वह उपवास नहीं खोलती है |इसके बाद वह अपने भाइयों को तरह-तरह के भोजन खिलाती है, खास कर दोपहर के भोजन मे खीर बनती हैं | इस दिन सभी बहने आपने भाई को राखी बांधने के बाद मंदिरों में जाकर पंडितों तथा ब्राह्मणों को भोजन करवाती है |

अन्य राज्यो में रक्षाबंधन

उत्तराखंड में इसे श्रवणी तथा गुरु पूर्णिमा के नाम से भी जानते है | इस दिन यहां के लोग ब्राह्मणों को दान देते तथा अपने-अपने घर में भोजन करवाते हैं |

महाराष्ट्र में इस त्यौहारों को नारियल पूर्णिमा या श्रावणी के नाम से भी जाना जाता है | इस दिन लोग नदी या सागर के किनारे जाकर अपने जनेऊ को बदलते है | इस दिन लोग सागर के किनारे जाकर वरुण देवता को नारियल चढ़ाते है | यहाँ के लोगो का मानना है की इस दिन वरुण देव को नारियल चढने से वरुण देव बहुत प्रसन्न होते है |

राजस्थान में बहन अपने भाई को राम राखी, चुडा राखी या लूंबा बांधती है | राम राखी अन्य राखियो से अलग होती है, क्योकि इसमें लाल डोरे पर पीले छींटों वाला फुँदना लटका होता है | यह राखी सिर्फ भगवान को ही बंधी जाती है | चुडा राखी सिर्फ भाभियों की चूड़ियों में ननद ही बांधती हैं |

जोधपुर में राखी के दिन केवल राखी ही नहीं बांधते बल्कि इस दिन लोग मिनकानाडी पर गोबर लगाकार, मिट्टि और भस्मी (पूजा में जब हवन होता उसके बाद जो हवन कुंड में राख बचती है उसे भस्मी कहते है )को पुरे शरीर पर लगाकर नहाना शुद्ध माना जाता है |इसके बाद धर्म तथा वेदों की कथा सुनना साथ ही अंरूधती, गणपति, दुर्गा,गोभिल तथा सप्तर्षियों (ये सभी हिन्दू धर्म के देवी-देवता है )के पूजास्थल बनार और उनके मंत्र के साथ पूजा की जाती है | इस दिन धार्मिक कार्य करने के बाद ही घर आकर हवन किया जाता है, रेशमी डोरो से बनी राखी को कच्चे दूध से मंत्र के साथ शुद्ध करते हैऔर फिर बांधते है | इसके बाद ही भोजन करते है |

तमिलनाडु ,केरल, महाराष्ट्र और उड़ीसा के दक्षिण भारत के ब्राह्मण (पंडित) इस त्यौहारों को अवनि अवित्तम के नाम से भी जानते है | जनेऊ धारण करने वाले ब्राह्मण के लिए यह त्यौहारों बहुत महत्वपूर्ण है | इस दिन नदी या समुद्र के किनारे स्नान करने के बाद ऋषियों का तर्पण (संतुष्ट) करके एक नया जनेऊ धारण करते है | इस दिन लोग अपने बीते हुए समय के साथ पुराने पापों को पुराने जनेऊ की तरह त्यागकर अपने जीवन में जिस तरह एक नया जनेऊ धारण करते है उसी तरह एक नए जीवन की शुरुआत करने की प्रतिज्ञा लेते है |

उत्तर प्रदेश में श्रावण (सावन) मास की पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जाता है | इस त्यौहार पर बहन अपना प्यार रक्षा (राखी) को अपने भाइयों की कलाई पर बांध कर जताती है | इस त्यौहार पर भाई  बहन को उपहार देकर आने वाले भविष्य में संकट के समय सहायता करने का वचन देता है |

2017 मे राखी बांधने का समय :-

इस बार सावन मास को बहुत शुभ माना जा रहा है | इस बार पांच सोमवार  है जो की शुभ संकेत है | इस साल राखी का त्यौहार 7अगस्त को मनाया जा रहा है लेकिन सावन के शुभ संकेत होने बाद भी राखी पर ग्रहो का प्रकोप बना हुआ है | 

6 अगस्त की रात10:30 बजे का शुभ मुहूर्त है और 7 अगस्त को सुबह 11:05 से दोपहर 3:27 बजे तक ही है, इसके बाद कोई शुभ समय नहीं है |इस दिन चंद्र ग्रहण भी है जो रात 10:52 से 12:22 तक ही रहेगा |

Top