भैया दूज
Last Updated : 2017-09-05 11:47:24 AM

भैया दूज भारतीय हिंदू लोगों के द्वारा मनाया जाने वाला एक पवित्र त्यौहार है | भैयादूज कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाते हैं और यह एक धार्मिक त्यौहार है | इस त्यौहार को यम द्वितीय, भाई दूज, और भातृ द्वित्य के नाम से भी जाना जाता है | इसे त्यौहार का प्रारंभ पौराणिक काल से हुआ था और इसका उद्देश्य भाई की लंबी आयु के लिए है | यह मान्यता है, कि इस दिन प्रात काल चंद्र दर्शन की परंपरा है | इस दिन व्यक्ति यमुना नदी के जल में भी स्नान करते हैं | इस त्यौहार के साथ देव चित्रगुप्त की पूजा करते है, तथा चित्रगुप्त जयंती मनाई जाती है | भारत समाज में सबसे पहला और अहम पहलू परिवार होता है और परिवारों की एकता नैतिक मूल्य पर होती है | इन नैतिक मूल्यों को  संस्कारों से ही मजबूत किया जा सकता है | यह त्यौहार भाई बहन के अनमोल रिश्ते को दर्शाता है |

महत्व

भाई दूज के दिन भाई को तिलक लगाकर स्नेहपूर्वक भोजन कराने से प्रेम तो बढ़ता ही है साथ में भाई की लंबी उम्र भी होती है ऐसी मान्यता है | भाई का प्रेम सबसे अनोखा होता है जितना महत्व रक्षाबंधन के त्यौहार को दिया जाता है उतना ही महत्व भैया दूज के त्यौहार को दिया जाता है | बहन के प्रति भाई का प्यार प्रकट करने के लिए इससे कोई अच्छा अवसर नहीं |

यमराज और यमुना सूर्यदेव की पत्नी छाया से हुए थे, यमुना अपने भाई से निवेदन करती थी कि वह उसके घर आकर खाना खाए परंतु यमराज को समय नहीं मिलता था, जब कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन यमुना ने अपने भाई को अपने घर के द्वार पर खड़े देखा तो वह अति प्रसन्न हो गई फिर उसने यमराज का स्वागत कर उसे भोजन कराया | यमराज प्रसन्न हुए और अपनी बहन से वर मांगने को कहा तब यमुना ने यमराज से कहा कि आप प्रतिवर्ष इसी दिन मेरे घर आकर भोजन करेंगे तथा जो बहन अपने भाई को टीका करने के पश्चात भोजन खिलाएगी उसे आपका भय नहीं रहेगा | फिर यमराज अपनी बहन को वर देकर यमपुरी चले गए | ऐसा भी माना जाता है, कि जो भाई आज के दिन यमुना में स्नान करेगा उसे तथा उनकी बहन को यम का भय नहीं होगा |

भाई दूज की तिथि तथा समय

इस वर्ष हिंदू पंचांग के अनुसार भाई दूज का त्यौहार 21 अक्टूबर, 2017 को मनाया जाएगा | तिलक लगाने का समय दिन में 1:12 से लेकर 3:27 तक का है |

भाई दूज बनाने की विधि

इस दिन सुबह स्नान के बाद विष्णु और गणेश की पूजा करनी चाहिए, उसके बाद भाई को तिलक लगाना चाहिए | इस दिन सभी बहनें अपने भाइयों को रोली तथा अक्षत से तिलक करती हैं और उनके उज्जवल भविष्य के लिए आशीर्वाद देती है | भाई अपनी बहन को कुछ उपहार या दक्षिणा देते हैं | भैया दूज दिवाली के 2 दिन बाद आता है | यह एक ऐसा त्यौहार होता है जिसमें भाई के प्रति बहन का प्रेम अभिव्यक्त होता है | इस पूजा में बहने अपने भाई की हथेली पर चावल का घोल लगाती हैं तथा माथे पर तिलक लगाकर फूल, पान, सुपारी आदि हाथों पर रखकर धीरे-धीरे हाथों से छोड़ते हुए मंत्र बोलती है |

जैसे "गंगा पूजे यमुना को यमी पूजे यमराज को, सुभद्रा पूजा कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई की आयु बढ़े" इन मंत्रों के साथ हथेली की पूजा होती है | ऐसी मान्यता है, कि अगर आज के दिन कोई पशु,जीव या भयंकर जानवर काट ले तो यमराज के दूत भाई के प्राण नहीं ले जाएंगे |

भैया दूज मनाने के अन्य तरीके

 भैया दूज बहुत तरीकों से मनाई जाती है, जैसे बहन भाई के माथे पर तिलक कर उनकी आरती उतारती हैं, उसके बाद हथेली में कलावा बनती है | मुंह मीठा कराने के लिए उन्हें मक्खन और मिश्री का मिश्रण भी खिलाती है | शाम को बहने यमराज के नाम से चार मुख वाला दिया जलाकर घर के बाहर रखती हैं | इस विधि के समय अगर शाम को आसमान में चील उड़ती दिखाई दे तो यह बहुत शुभ माना जाता है | जब बहने अपने भाई के लिए दुआ मांगती है यमराज उसे कबूल कर लेते हैं या चील बहनों का संदेश यमराज के पास पहुंचाता है |

चित्रगुप्त जयंती

इस दिन चित्रगुप्त जयंती भी मनाई जाती है, तथा देव चित्रगुप्त की पूजा की जाती है | स्वर्ग में धर्मराज का लेखा-जोखा रखने वाले चित्रगुप्त का पूजन तस्वीरों और मूर्तियों से किया जाता है | इस दिन कारोबारी बहीखातों की पूजा भी करते हैं |

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