नवरात्र
Last Updated : 2017-09-05 11:41:07 AM

नवरात्र हिंदुओं का प्रसिद्ध त्योहार है, यह शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है नव+रात्र= नवरात्रि जिसका अर्थ है “नौ रातें” और 10 दिन |  इन नवरात्रों में 9 देवियों की पूजा होती है और दसवें दिन को दशहरा के नाम से जाना जाता है | नवरात्र वर्ष में चार बार आता है- पौष, चैत्र , आषाढ़, अश्विनी | नवरात्रों में तीन देवियों की पूजा होती है महालक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा तथा इन के नौ स्वरुपों की आराधना की जाती है जिसे नवदुर्गा पूजा कहते हैं | दुर्गा मां का अर्थ कष्टों को हरने वाली  होता है नवरात्रि एक महत्वपूर्ण त्यौहार है जिसे पुरे भारत में महान उत्साह तथा पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है |

प्राचीन काल में श्री रामचंद्र जी ने इस नवरात्रि पूजा का प्रारंभ समुंद्र तट पर किया तथा दसवें दिन लंका विजय के लिए प्रस्थान किया और विजय प्राप्त की। 

नवरात्र का महत्व-

सती जो सतयुग के राजा दक्ष की पुत्री थी, शिव के कारण उनका नाम शक्ति हो गया बाद में सती ने पार्वती के रूप में जन्म लिया | पार्वती ने पिता की अनिच्छा से हिमालय पर्वत पर रहने वाले शिव भगवान से विवाह कर लिया | जब एक यज्ञ में दक्ष ने पार्वती और शिव को न्योता नहीं दिया था तब भी पार्वती और शिव उस यज्ञ में आए | दक्ष ने शिव को देखा तथा उन्हें अपमानित किया | पार्वती को यह बर्दाश्त नहीं हुआ और वही यज्ञ कुंड में कूद कर अपने प्राण त्याग दिए | यह सुनकर शिव ने अपने सेनापति को दक्ष का गला काटने के लिए भेजा | इसके बाद शिव सती का शरीर लेकर धरती पर घूमते रहे | इस दौरान जहां-जहां सती के शरीर के अंग या आभूषण गिरे वहां बाद में शक्तिपीठ निर्मित किए गए।  

नवदुर्गा यानी नवरात्र की नौ देवियां हमारे संस्कार एवं आध्यात्मिक संस्कृति के साथ जुड़ी हुई हैं । इस साधना और आध्यात्म का अद्भुत संगम है, जिसमें देवी दुर्गा की कृपा की बरसात होती है। सृष्टि के निर्माण के समय से ही शक्ति की आराधना की जाती रही है । सबसे पहले भगवान विष्णु ने मधु नामक दैत्य के वध के लिए इस व्रत का पालन कर अपने उद्देश्य में सफलता प्राप्त की । भगवान शंकर ने त्रिपुरासुर के नाश के लिए यही व्रत किया था । जब देवगुरु बृहस्पति की माता का हरण चंद्रमा ने कर लिया तो इस समस्या के समाधान के लिए यही व्रत उन्होंने भी किया। त्रेता युग में प्रभु श्रीराम की  माता सीता के लिए देवर्षि नारद के कहने से भगवान श्रीराम ने इस व्रत को करके रावण पर विजय पाई। यही अनुष्ठान महर्षि भृगु, वशिष्ठ, कश्यप ने भी किया। सभी प्रकार की मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए नवरात्र में शक्ति की अराधना श्रेष्ठ मार्ग है।

नवरात्रों की तिथि

इस वर्ष नवरात्रि 21/सितंबर/2017 से लेकर 29/सितंबर/2017  तक है |

नवरात्र के लिए पूजन विधि

नवरात्र के प्रथम दिन स्नान के बाद धरती माता, इष्ट देव व गुरुदेव को नमन करने के बाद गणेश जी का आवाहन करके कलश की स्थापना करनी चाहिए | कलश में आम के पत्ते और पानी डालें |

कलश पर पानी वाले नारियल को लाल कपड़े या मौली में बाँधे और उसमें एक बादाम दो सुपारी और एक सिक्का जरूर डालना चाहिए | इसके बाद मां लक्ष्मी व मां दुर्गा एवं मां सरस्वती का आवाहन करना चाहिए | जोत या धूपबत्ती जलाकर  देवी के नौ रूपों की पूजा करनी चाहिए |नवरात्रि के खत्म होने पर कलश के जल का घर में छींटा मारे और कन्या पूजन के बाद प्रसाद का वितरण करें |

9 दिन, नौ देवी के रूप एवं भोग

1 शैलपुत्रीमां - पहला दिन

शैलपुत्री को सफेद चीजों का भोग लगाया जाता है, अगर यह पदार्थ गाय के घी में बनी हों तो व्यक्ति को रोगों से मुक्ति मिलती है और हर तरह की बीमारी दूर होती है |

2 ब्रह्मचारिणी -  दूसरा दिन

मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री, चीनी और पंचामृत का भेग लगाया जाता है | इन्हीं चीजों का दान करने से लंबी आयु का सौभाग्य भी पाया जा सकता है |

3 चंद्रघंटा - तीसरा दिन

मां चंद्रघंटा को दूध और उससे बनी चीजों का भोग लगाएं और और इसी का दान भी करें | ऐसा करने से मां खुश होती हैं और सभी दुखों का नाश करती हैं |

4. मां कुष्मांडा -  चौथा दिन

मां कुष्मांडा को मालपुए का भोग लगाएं | इसके बाद प्रसाद को किसी ब्रह्मांड को दान कर दें और खुद भी खाएं | इससे बुद्धि का विकास होने के साथ-साथ निर्णय क्षमता भी अच्छी हो जाएगी | इनकी हंसी से ब्रह्मांड उत्पन्न हुआ था , माता कुष्मांडा के हाथों में कमल मंडल धनुष बाण,कमल, अमृत कलश, चक्र तथा गदा है | इनके आठवें हाथ में मनोवांछित फल देने वाली जप माला है |

5. मां स्कंदमाता - पांचवा दिन

मां स्कंदमाता की पंचमी तिथि के दिन पूजा करके भगवती दुर्गा को केले का भोग लगाना चाहिए और यह प्रसाद ब्राह्मण को दे देना चाहिए | ऐसा करने से मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है| देवी का एक पुत्र कार्तिक (स्कंद) है, जिन्हें देवासुर संग्राम में देवताओं का सेनापति बनाया गया था | इस रुप में देवी अपने पुत्र स्कंद को गोद में लिए बैठी है | स्कंदमाता अपने भक्तों को शौर्य प्रदान करती है

6. मां कात्यायनी - छठा दिन

मां कात्यायनी षष्ठी तिथि के दिन देवी के पूजन में मधु का महत्व होता है | इस दिन प्रसाद में मधु यानि शहद का प्रयोग करना चाहिए | इसके प्रभाव से साधक सुंदर रूप प्राप्त करता है | कात्यायनी का अवतार महिषासुर वध के लिए हुआ था यह देवी अमोघ फलदायिनी है | भगवान कृष्ण को पति के रुप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने देवी कात्यायनी की आराधना की थी | जिन लड़कियों ने शादी नहीं हो रही हो या कोई बाधा हो वह कात्यानी माता की उपासना करें |

7. मां कालरात्रि - सातवां दिन

मां कालरात्रि सप्तमी तिथि के दिन भगवती की पूजा में गुड़ का नैवेद्य अर्पित करके ब्राह्मण को दे देना चाहिए | ऐसा करने से व्यक्ति शोकमुक्त होता है | यह भगवती का विकराल रूप है | गदहे पर अरुण यह देवी अपने  हाथों में लोहे का कांटा तथा खडग कटार भी लिया है | इनके भयानक स्वरूप को देखकर विध्वंसक शक्तियां पलायन कर जाती है |

8. मां महागौरी -  आठवां दिन

मां महागौरी अष्टमी के दिन मां को नारियल का भोग लगाएं | नारियल को सिर से घुमाकर बहते हुए जल में छोड़ दें | ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से आपकी मनोकामना पूर्ण होगी | यह भगवती का सौम्य रूप है | चतुर्भुजी माता वृषभ पर विराजमान हैं इनके दो हाथों में त्रिशूल और डमरू है अन्य दो हाथों द्वारा वर और अभय दान कर रही हैं भगवान शंकर को पति के रुप में पाने के लिए भवानी ने अति कठोर तपस्या की तब उनका रंग काला पड़ गया था तब शिवजी ने गंगाजल द्वारा इन का अभिषेक किया तो यह गौरवर्ण की हो गई इसीलिए गौरी कहा जाता है |

9. मां सिद्धिदात्री  -  नौवां दिन

मां सिद्धिदात्री नवमी तिथि पर मां को विभिन्न प्रकार के अनाजों का भोग लगाएं जैसे- हलवा, चना-पूरी, खीर और पुए और फिर उसे गरीबों को दान करें | इससे जीवन में सुख-शांति मिलती है | इनकी अनुकंपा से समस्त सिद्धियां प्राप्त होती हैं | यह चतुर्भुजी देवी अपनी चार भुजाओं में शंख, चक्र, गदा और कमल धारण किए हुए हैं सिद्धिदात्री की पूजा से नवरात्र में नवदुर्गा पूजा का अनुष्ठान पूर्ण हो जाता है |

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