दीपावली
Last Updated : 2017-09-05 11:34:03 AM

दीपावली शब्द का अर्थ दीपों की पंक्ति होता है इसे लोग दीवाली भी बोलते हैं | हिंदू धर्म के लोग दीवाली के उत्सव को मनाने के लिए बहुत उत्सुकता के साथ इंतजार करते हैं यह बहुत महत्वपूर्ण और सांस्कृतिक त्यौहार होता है| दीपावली के दिन सारे घर दीपों की पंक्तियां से सुसज्जित और शोभायमान होते है, लोग अपने घर के कोनो-कोनो तथा मंदिरों को लाखों दियो, मोमबत्तियों की पंक्तियों से रोशन करते हैं और अपने जीवन के खालीपन को दीपों के प्रकाश के द्वारा खुशियों से भर देते हैं | इसीलिए इसे दीपावली की रोशनी का पर्व भी कहा जाता है | यह त्यौहार अपने साथ लाखो ढेरों खुशियाँ लाता है | यह पर्व शरद ऋतु में हर वर्ष मनाया जाता है, और पटाखों की गूंज से पूरा देश झूम उठता है | यह त्यौहार अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है तथा यह एक सामाजिक और धार्मिक त्यौहार भी है | “तमसो मा ज्योतिर्गमय” इसका मतलब अंधेरे से प्रकाश की और जाइए  होता है | इसे सिख, बौद्ध और जैन धर्म के लोग भी बनाते हैं | यह त्यौहार जो दशहरा के 20 दिन बाद अक्टूबर या नवंबर के महीने में आता है इस त्यौहार को भगवान राम के विजय होने की खुशी में मनाते हैं |

महत्व

यह त्यौहार घर में लक्ष्मी के प्रवेश का संकेत देता है तथा बुराई पर अच्छाई पाने के लिए मनाया जाता है | जैसे कि रावण को मार कर भगवान श्रीराम ने धरती को नष्ट होने से बचाया था | इस दिन घरों, दुकानों, कार्यालय और आदि स्थानों पर साफ सफाई करने से उस जगह पर लक्ष्मी का प्रवेश होता है | इसे सिखों के गुरु श्री हरगोविंद जो ग्वालियर की जेल से जहांगीर द्वारा रिहाई की खुशी में भी बनाया जाता है | नेपालियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण त्योहार है, क्योंकि इस दिन नेपाल संवत में नया साल शुरु हुआ था |

इस दिन नई चीजों को खरीदने से भी घर में माता लक्ष्मी का आवाहन होता है | सभी धर्मों के और जातियों के लोग इसका सामान रूप से आदर करते हैं | जैन धर्म के लोग इसे महावीर के मोक्ष दिवस के रुप में मनाते हैं, तथा सिख लोग इसे बंदी छोड़ दिवस के रुप में मनाते हैं | जब भगवान राम 14 वर्ष का बनवास काट कर अयोध्या वापस लौटे और रावण को हराने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, भगवान राम के वापस लौटने के बाद उनके स्वागत के लिए सभी अयोध्या के लोगों ने पूरे उत्साह के साथ अपने घरों और मार्गों को बड़ी धूम-धाम से सजाया था |

दिवाली की तिथि

इस वर्ष छोटी दिवाली - 18/अक्टूबर/2017 को आएगी

बड़ी दीवाली - 19/अक्टूबर/2017 को आएगी |

तैयारियां

इस दिन बाजारों को शानदार तरीक़ो से सजाया जाता है तथा हजारों लोगों की संख्या की तादाद बाजारों में काफी देखने को मिलती है | खासतौर पर मिठाइयों की दुकानों पर ज्यादा भीड़ होती है | बच्चों के लिए यह दिन अति खुशीहाल वाला दिन होता है, क्योंकि इस दिन बच्चे नए कपड़े खिलौने, पटाखे और उपहारों को खरीदते हैं | लोग दिवाली आने के कुछ दिन पहले लोग अपने घरों की साफ सफाई में लगे रहते हैं तथा रोशन लड़ियों को अपने घर के बाहर और अंदर सजा देते हैं | भारत में दीवाली को नए साल के रूप में भी मनाते हैं | इस दिन दीये को रंगीन रंगो सजाया जाता है | घर में सफेद पेंट करवाई जाती है, घरों की दीवारों को सुंदर फूलों की सुंदर पंक्तियों से सजाया जाता है, घर की चौखट पर रंग बिरंगे रंगों से रंगोली बनाई जाती है तथा घर के पुराने सामानों को बदला जाता है | दिवाली 5 दिनों का एक लंबा त्यौहार होता है | दिवाली के पहले दिन धनतेरस, दूसरे दिन छोटी दीपावली, तीसरे दिन लक्ष्मी लक्ष्मी का पूजन, चौथे दिन गोवर्धन का पूजन, तथा पांचवे दिन भैया दूज मनाया जाता है |

लक्ष्मी गणेश पूजन

दिवाली पर मां लक्ष्मी, सरस्वती और गणेश जी की पूजा और आराधना की जाती है तथा भगवान से सुख समृद्धि, बुद्धि, घर में शांति और तरक्की का वरदान मांगा जाता है | लक्ष्मी गणेश की पूजा में सबसे पहले एक शुभ स्थान पर सफेद वस्त्र बिछाकर लक्ष्मी, सरस्वती और गणेश की मूर्ति को विराजमान करते हैं | इसके बाद थोड़ा सा जल लेकर उस मूर्ति पर छिड़क कर मंत्र पढ़ते हैं | पूजन की तैयारी में निम्नलिखित सामग्री होती है, जैसे- सरस्वती व गणेश जी की मूर्ति, रोली, कुमकुम, लौंग, इलाइची, धूप, कपूर, अगरबत्ती, मिट्टी के दीपक, गंगाजल, सिंदूर, चांदी के सिक्के, दूध तथा देवताओं के चढ़ावे के लिए मिठाइयाँ | सबसे पहले भगवान गणेश जी तथा गौरी का पूजन किया जाता है, उसके बाद कलश पूजन फिर नवग्रहों का पूजन किया जाता है | इन सभी पूजन के बाद 16 मृतककाओ को गंध, अक्षत व पुष्प प्रदान करते हुए पूजन करते हैं | पूजन प्रक्रिया के बाद गणपति लक्ष्मी और सरस्वती को अर्पण किया जाता है तथा स्वयं के हाथ में भी मौली बांधी जाती है |

दिवाली के पकवान

दिवाली के दिन बहुत तरीकों के पकवान बनाए जाते हैं, जैसे बादाम की बर्फी, खीर, गुलाब जामुन, तिरंगी बर्फी, मालपुआ और गुजिया | लोगों के घर पर जो मेहमान दिवाली की बधाइयां देने आते हैं उन्हें बिना मिठाई खिलाएं विदा नहीं करते | आजकल महंगाई इतनी बढ़ रही है की दुकान वाले खाने पीने के सामानों में मिलावटी सामान मिलाते हैं इसीलिए कुछ लोग दुकान से मिठाई ना खरीदकर अपने घर पर ही मिठाइयाँ बनाने की तैयारी करते हैं |

अन्य हिस्सों में दीपावली

नेपाल

नेपाल में दीपावली को “तिहार” या "स्वन्ति" के नाम से जाना जाता है | यहां भी यह 5 दिन तक मनाया जाता है लेकिन परंपरा में भिन्नता पाई जाती है | पहले दिन कौए को परमात्मा का दूत मानकर प्रसाद दिया जाता है, दूसरे दिन को कुत्तों को अपनी ईमानदारी के लिए भोजन दिया जाता है, चौथे दिन गाय और बैल को सजाया जाता है | नेपाल में यह दिन साल का आखिरी दिन होता है ,पांचवें और अंतिम दिन को “भाई टीका” के नाम से जाना जाता है | पांचवें दिन भाई-बहन मिलते हैं एक दूसरे को पुष्प की माला पहनाते हैं और उनके लिए भलाई की प्रार्थना करते हैं |

सिंगापुर

सिंगापुर में यह आमतौर पर छोटे भारतीय जिलों में अनेक समुदाय द्वारा लाइट की रोशनी से चिन्हित किया जाता है | इसके अलावा यहां अनेक प्रकार की परेड और संगीत को अन्य लिटिल इंडिया के इलाकों में शामिल किया जाता है | सिंगापुर की सरकार इस त्यौहार के दौरान अनेक प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करती है |

न्यूजीलैंड

न्यूजीलैंड में दीपावली दक्षिण एशियाई लोगों के समूहों में सार्वजनिक रूप से मनाई जाती है | जो भारत समुदाय के सदस्य हैं या जो भारतीय लोग यहां बसे हुए हैं, इन लोगों ने 2003 में एक अधिकारी स्वागत के बाद दिवाली हिंदुओं द्वारा बनाया बनाई थी | यहां इस त्यौहार  को अंधकार पर प्रकाश तथा अन्याय पर न्याय का प्रतीक माना गया है | यहां पर माता लक्ष्मी को पूजा जाता है तथा माता लक्ष्मी प्रकाश धन और सौंदर्य की देवी होती है | प्रसाद में बर्फी और दिवाली के विशेष खाद्य पदार्थ चढ़ाए जाते हैं|

नुकसान और फायदे

इस दिन लोग जो अमीर घर के होते हैं वह बड़ी जोरदार और पटाखे भरी दिवाली मनाते हैं | बाजारों से लाखों की शॉपिंग करते हैं तथा पटाखों खरीदते हैं | पटाखे जोकी दिवाली के दिन नहीं जलाने चाहिए, पटाखे जलाने से हमारा आसपास का वातावरण प्रदूषित होता है पर कुछ लोगों की दिवाली पटाखे के बिना अधूरी रहती है, जिसके कारण बहुत नुकसान होता है | पटाखे फोड़ने से तेज आवाज और तरंगे उत्पन्न होती है जिससे कमजोर दिल के व्यक्ति को भी शारीरिक नुकसान हो सकता है | पटाखे जलाते वक्त कुछ रॉकेट तथा बम दूसरे घर जाकर फटते हैं जिससे कई बार आग लगने की आशंका होती है और ऐसा कई बार होता भी है | पटाखे खरीदने से पैसों का भी बहुत नुकसान होता है पटाखों का क्या है आज जलाने कल खत्म हो जाएंगे पर यह अमीर लोग और पटाखों के शौकीन इस बात को कभी नहीं समझेंगे |

कई लोगों को दिवाली के दिन घर में ही अपने सदस्य और परिवार के साथ दिवाली मनाकर खुशी प्राप्त करते हैं | उनके पास पैसे नहीं होते पर तब भी बहुत खुश होते हैं, क्योंकि गरीब लोगों को दिवाली मनाने के लिए पैसों की जरुरत नहीं होती उनको बस अपने पूरे परिवार के साथ दीवाली मनाना और उनके साथ समय गुजारने से भी बहुत खुशी मिलती है | गरीब लोग घर में खाली एक दीया जलाकर और भगवान की आरधना करके दिवाली मनाते हैं और अपने घर के अंदर कार को दूर करते हैं ऐसा सबको करना चाहिए | दिवाली के दिन जो दूसरों के कार्यालय में काम करते हैं उनको बहुत बड़े-बड़े उपहार दिए जाते हैं तथा सबको मिठाइयों के डिब्बे बांटे जाते हैं | हर घर में खुशियों की बधाईयों के साथ अधिक पैसे भी दिए जाते हैं | कुछ लोग इस दिन दारु पीते हैं और जुआ भी खेलते हैं | पर उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए, उन्हें अपने परिवारों के साथ मिलजुल कर इस दिन का आनंद लेना चाहिए |

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