दशहरा
Last Updated : 2017-09-05 11:27:42 AM

दशहरा हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है | यह त्यौहार अश्विन क्वार मास के शुक्लपक्ष की दशमी तिथि को आता है | भगवान राम ने इस दिन रावण का वध किया था तथा देवी दुर्गा ने नौ रात्रि एवं दस दिन के युद्ध के उपरान्त महिषासुर पर विजय प्राप्त की थी । इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। इसीलिये दशमी को 'विजयादशमी' के नाम से जाना जाता है। दशहरा वर्ष की तीन अत्यन्त शुभ तिथियों में से एक है चैत्र, शुक्ल की एवं कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा ।

इस दिन लोग शस्त्र पूजा करते हैं और नए कार्य का प्रारंभ करते हैं | जैसे नया कार्य करना और बीज बोना | कुछ लोगों का मानना है कि इस दिन नए कार्य आरंभ करेंगे तो विजय प्राप्त होगी प्राचीन काल में भी राजा इस दिन विजय की प्रार्थना कर यात्रा आरंभ करते थे |

दशहरे का महत्व -

इस दिन जगह-जगह मेले लगते हैं, रामलीला का आयोजन होता है तथा रावण और उसके भाइयों का पुतला बनाकर उसे चलाया जाता है | इस दिन लोग शास्त्र पूजन भी करते हैं | यह भारतीय संस्कृति वीरता का पूजक, शौर्य की उपासक हर्ष और उल्लास पर्व है |

समाज और व्यक्ति के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का पर्व रखा गया है | यह पर्व 10 प्रकार के पापी कार्य  जैसे- क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के परित्याग की सदप्रेरणा प्रदान करता है |

दशहरे की तिथि

इस वर्ष दशहरा 30/दिसंबर/2017 को है

दशहरे का पूजन एवं तैयारियां -

 दशहरे के दिन लोग सुबह स्नान के बाद नए कपड़े पहनते हैं | घर के सभी सदस्य सुबह नहा धोकर पूजा की तैयारी करते हैं उसके बाद गाय के गोबर से 10 कंडे बनाए जाते हैं | इन कंडो पर दही लगाई जाती है | दशहरे के पहले दिन जौ उगाई जाती है वह दशहरे के दिन इन कंडो के ऊपर रखा जाता हैं | उसके बाद दीप जलाकर अक्षत से रावण की पूजा की जाती है | भगवान की झांकियां पर भी यह जौ चढ़ाए जाते हैं | इस दिन लोग पूजा के समय बहुत सारे दीपों की पंक्ति जलाते हैं और पूरे घर को दीयों की रोशनी से रोशन कर देते हैं | सारे लोग बाजारों से खरीदारी करते हैं जैसे मिठाइयां, नए कपड़े, घर के सजावट के लिए समान, और दिवाली के लिए पटाखे | दशहरे के दिन बाजारों में बहुत भीड़ होती है |

दशहरे के कुछ दिनों पहले ही मेले में झूले और रंगमंच की तैयारी होती है जिसमें लोग दशहरे की कथा का नाटक दिखाने के लिए रंग मंच पर नृत्य और नाटक का प्रयास करते हैं | जिसे लोग रामलीला कहते हैं |

इस दिन रावण उसके भाई कुंभकरण और पुत्र मेघनाथ के पुतले जगह-जगह जलाए जाते हैं | पूजा करने के बाद संध्या समय में जब "विजय" नामक तारा उदय होता है तब रावण का दाह संस्कार पुतले के रुप में किया जाता है | रावण के पुतले को सूर्य डूबने से पहले समाप्त किया जाता है |

विभिन्न देशों में दशहरे का त्यौहार -

हिमाचल

हिमाचल में कुल्लू का दशहरा बहुत प्रसिद्ध है | यहां भी 1 हफ्ते पहले दशहरे की तैयारी आरंभ की जाती है, लोग नए कपड़े पहनते हैं और ढोल नगाड़े बांसुरी को लेकर बाहर निकलते हैं  ग्रामीण लोग देवता का धूमधाम से जुलूस निकालकर पूजा करते हैं और देवताओं की मूर्तियों को भी बहुत आकर्षक पालकी में सुंदर ढंग से सजाया जाता है |

पंजाब

पंजाब में लोग 9 दिन का उपवास रखकर दशहरा मनाते हैं| यहां मेहमानों का स्वागत मिठाई और उपहारों से किया जाता है | यहां पर भी रावण के पुतले जलाए जाते हैं तथा मैदानों में बड़े बड़े मेले लगते हैं |

बंगाल, उड़ीसा और असम -

इन देशों में दशहरा दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है | यहां के लोग दशहरा को बहुत महत्वपूर्ण त्यौहार मानते हैं तथा बंगाल में तो पूरे 5 दिनों के लिए बनाया जाता है | देश के कलाकारों को बुलाकर दुर्गा मूर्ति की तैयारी करवाई जाती है और अन्य देवी-देवताओं को भी सजाया जाता है | दशहरा के दिन यहां छोटे-मोटे स्टाल मिठाइयों से भरे रहते हैं | दशमी के दिन विशेष पूजा की जाती है, प्रसाद चढ़ाया जाता है तथा प्रसाद को बांटा जाता है | स्त्रियां  देवी को सिंदूर चढ़ाती है तथा देवी को विदा करती हैं | इस दिन यहां नीलकंठ पक्षी को देखना बहुत ही शुभ माना जाता है |

गुजरात -

यहां मिट्टी का रंगीन घड़ा देवी का प्रतीक माना जाता है और इस मटके को कुंवारी लड़कियां सिर पर रखकर नृत्य करती हैं जिसे गरबा कहा जाता है | गरबा नृत्य इस पर्व की शान होता है | स्त्रियां और पुरुष संगीत की लय पर डांडिया आपस में बजाते हुए घूम-घूमकर नृत्य करते हैं | इस अवसर पर लोग भक्ति फिल्म एवं लोक संगीत सभी का आयोजन होता है | यहां नवरात्रि में सोने और गहनों की खरीद को शुभ माना जाता है  |

दशहरा के पकवान -

इस दिन लोग घरों में  नेक प्रकार के पकवान भी बनाते हैं जैसे समोसा, कचोरी, जलेबी,लड्डू,हलवा पेड़ा और बर्फी आदि | गुजिया अनेक तरीके से बनाई जाती हैं इसे चासनी में, मावा से भरी हुई गुजिया एवं गोलाकार वाली भी बनाई जाती है | और गुजिया को पूरे परिवार के साथ मिल कर खाते हैं, तथा पड़ोसियों और रिश्तेदारों को उपहार के रूप में देते हैं | गुजिया को आसपास के लोगों में प्रसाद के रूप में बांटा जाता हैं |

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