क्रिसमस डे
Last Updated : 2017-09-13 2:02:04 PM

क्रिसमस शब्द का जन्म क्राइस्ट मास शब्द से हुआ है | ईसाइयों का सबसे बड़ा और प्रमुख त्यौहार है | ईसाई समुदाय के लोग क्रिसमस के त्यौहार को बड़े ही धूमधाम और उल्लास के साथ बनाते हैं | क्रिसमस का त्यौहार हर साल ईसाइ समुदाय के लोग 25 दिसंबर के दिन मनाते हैं क्योंकि प्रभु ईसा मसीह या यीशु का जन्म इसी तिथि मे हुआ था | क्रिसमस को बड़ा दिन के नाम से भी मनाया जाता है और इस दिन लगभग पूरे विश्व में छुट्टी रहती है | क्रिसमस का त्यौहार ईसाईयों का सबसे बड़ा और खुशी का त्यौहार है |  क्रिसमस के दिन  लोग एक दूसरे को तोहफा देते है, चर्च को सजाना, क्रिसमस का पेड़ रंग बिरंगी रोशनियाँ, बंडा, जन्म की झाँकी और हॉली आदि  शामिल है |

ईसा मसीह या यीशु  का जन्म :-

बाइबल के नए स्टेटमेंट में ईसा मसीह के जन्म से संबंधित एक कथा को व्यापक रुप से बताया गया है की प्रभु ने मैरी नाम की एक कुंवारी कन्या के पास गैब्रियल नाम कि एक देवदूत को भेजा गया था | उस देवदूत ने मैंरी को बताया कि वह प्रभु के पुत्र को जन्म देने वाली है और उन्हें उस बच्चे का नाम जीजस रखना है | देवदूत ने बताया कि जीसस बड़ा होकर  राजा बनेगा तथा उसके राज्य की कोई सीमा नहीं होगी |इसके बाद देवदूत तुरंत ही गैब्रियल जोसफ  के पास भी गया उन्होंने बताया कि मेरी नाम की स्त्री से शादी करनी है, वह प्रभु के पुत्र को जन्म देने वाली है और जोसफ को उनकी देखरेख करनी है और उन्हें  उस स्त्री को कभी नहीं  त्यागना है | जिस दिन जीसस का जन्म हुआ था, उस समय मैरी और जोसफ बेथलेहम की तरफ जा रहे थे | उस रात  उन्होंने शरण ली थी, यही जीसस  का जन्म हुआ था | जब जीसस ने जन्म लिया था तो उन्हें नाद में रख दिया गया था | किसमिस के दिन आकाश में एक तारा बहुत ज्यादा ही चमक रहा था और इससे लोगों को इस बात का अनुभव हुआ इन रोम के शासन से बचाने के लिए उनके मसीहा ने जन्म ले लिया है |

महत्व :-

इस त्यौहार को आधी रात के समय  मनाया जाता है | इस दिन लोग अपने घरों में क्रिसमस के पेड़ भी सजाते हैं पेड़ पर अनेक प्रकार के तोहफो  लटकाते हैं,रात के समय इन सभी उपहारों  को छोटे-छोटे बच्चों को दिया जाता है,  इसके बाद मनोरंजन किया जाता है, लोग सुन्दर रंगीन वस्त्रों में ड्रम, मजीरे को परंपरा के अनुसार गानों पर चमकीली छड़ियाँ लेकर समूह में एक साथ नृत्य करते हैं | इस दिन प्रभु की प्रशंसा के लिए लोग कैरोल भी गाते हैं | इस दिन लोग एक दूसरे को दावत और शुभकामनाएं भी देते हैं साथ ही सभी को प्यार और भाईचारे की भावना का आदेश दिया जाता है | ईसाई समुदाय के लिए इस त्योहार का महत्व है जो हिंदू के लिए दशहरा तथा दिवाली का है यह त्यौहार विश्वभर में पहले ईसा मसीह के करोड़ों दासो के लिए पवित्रता का संदेश लाता है तथा उनके बताए हुए मार्गों उच्च आदर्शों पर चलने के लिए प्रेरित करता है | ईसाई समुदाय के  लोग अलग-अलग स्थानों पर अपनी अपनी  परंपराओं  और  रीति रिवाजों के साथ श्रद्धा, भक्ति और निष्ठा के साथ मनाते हैं |

सांता क्लॉस :-

इन्हें  सेंट निकोलस , फादर क्रिसमस और सांता के नाम से जानते है | पूरानी कथाओं के अनुसार सांता प्रचलित व्यक्त्ति है जो 24 दिसंबर को बच्चों के घरों में जाकर तोहफे देते है |सांता क्लॉस प्रेम और मानवता का सन्देश देता है और इनका काम पूरी दुनिया में खुशिया बाटना है | पश्चिमी लोगो का मानना है की सांता के जरिये लोगो में खुशियों बाटना ही ईश्वर की सच्ची सेवा है |जब भी सांता क्लॉस की बात आती है तो लोगो के मान में एक ऐसी छवि नज़र आती है, जो लाल कपड़े पहने हो, उनकी बड़ी बड़ी सफ़ेद दाढी हो, उनके चेहरे पर हँसी हो और साथ ही उनके पास तोहफों से भरा थैला हो | सांता क्लॉस को दयालु और दानशील माना जाता है | सांता क्लॉस नार्थ पोल में रहते है और रेनडियर पर सवार हो कर किसी बर्फीले जगह से आते है |

क्रिसमस डे का संदेश:-

किसमिस के दिन सबसे पहला सन्देश शांति का होता है, क्योकि पवित्र शास्त्रो के अनुसार ईसा मसीह शांति के राजकुमार कहलाते है | जब भी कोई व्यक्ति यीशु को याद करता, तो यीशु उन्हें हमेशा कहते थे कि “ शांति तुम्हारे साथ हो ” इसका तात्पर्य यह है,की शांति के बिना किसी की भी व्यक्ति का आस्तित्व नहीं है |क्रिसमस के दिन  घृणा, सघर्ष, हिंसा और युद्ध आदि किसी भी तरह के गलत कर्म से बचे रहने का आदेश मिलता है |ईसा मसीह के 12 शिष्यो में से एक संत योमस थे , जो की दक्षिण भारत में आये थे | संत योमस ने दक्षिण भारत में  पुराने समय के कुछ राजाओ के  महल में  भी काम किया था | उन्होंने अपने काम करने के साथ-साथ ईसा मसीह के सुविचारों को भी प्रसारित किया था, इन से प्रभावित होकर बहुत से लोगों ने ईसाई धर्म को अपनाया  था और इसी कारण से दक्षिण भारत में कई पुराने गिरजाघर देखने को मिलते हैं | बाइबल के पहाड़ प्रदेश के अनुसार ईसा मसीह ने कहा है कि -” धन्य है वो जो मेल करने वाले है , क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे “ अर्थात बाइबल और क्रिसमस सद्भावना और भाईचारे के संदेश को फैलाना  था |

क्षमा का अलग संदेश है, जो बाइबल के मुख्य सिद्धांत के अनुसार क्षमा करना सबसे बड़ा धर्म है | बाइबल के सिद्धांतों के अनुसार अगर आप ईश्वर के पास जाना चाहते हैं तो आपका हृदय और मन  साफ होना चाहिए | ईसा मसीह का कहना था कि दुसरो को माफ़ करना कोई शर्त नहीं बल्कि यह तो आपने मन को साफ और खाली रखना है |

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