मुस्लिम शादी (निकाह)
Last Updated : 2017-09-13 2:05:03 PM

मुस्लिम धर्म में होने वाली शादी को निकाह कहते है , निकाह करने के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं होता है | निकाह  एक प्रक्रिया है जिसके मुताबिक लड़का और लड़की की राजमंदी होने के बाद ही निकाह किया जाता है | निकाह में अगर दोनों में से किसी एक की मर्जी नहीं है, तो निकाह कबूल नहीं होता है | मुस्लिम धर्म की शादिया हिन्दू धर्म की शादियों से बहुत अलग होती है | हिंदु धर्म की शादी में सात फेरे होते है, जबकि मुस्लिम शादी में ऐसा नहीं होत्ता है बल्कि इनकी शादी काजी या वकील करवता है |

शादी से पहले रोक्का :-

इस रस्म में दूल्हे के घर वाले दुल्हन के लिए नए कपडे , कुछ जेवर साथ ही तरह तरह की मिठाईया आदि लेकर जाते है |इस रस्म में दूल्हे के खानदान की जानकारी (तफसील) खोलकर बताते है ,उनकी नौकरी, तनखा , दूल्हे की उम्र आदि सब लिख कर देते है | दूल्हे के वालिद (पिता)  यह सब जानकारी दुल्हन के वालिद को देते हैं | जो जानकारी दूल्हे के वालिद  देते हैं उन्हें सब के बीच पढ़कर सुनाया जाता है | इस रस्म के बाद कि दोनों खानदोनों की रजामंदी के बाद ही शादी की तारीख पक्की की जाती है |

शादी की तारीख:-

लड़के और लड़की की शादी की तारीख पक्की हो जाने पर दावत की जाती है |इस दावत में दुल्हन के घर दूल्हे के रिश्तेदारों तथा दुल्हन के रिश्तेदारो को भी बुलाया जाता है | दुल्हन के घर दूल्हे के वालिद तथा उनके रिश्तेदार दुल्हन की हल्दी का जोड़ा, तारीख का लाल दुपट्टा, एक टोकरी में अलग-अलग तरह के फल एवं मिठाईयां लेकर आते हैं | इस में दुल्हन के घर दूल्हा नहीं आता है |

शादी से पहले मेहंदी की रस्म :-

यह रस्म शादी से एक दिन पहले होती है | इसमे दुल्हन के हाथो तथा पैरो में मेहंदी लगाई जाती है | इस दिन दोनों ही घरो मे सदका (गरीबों में पैसे तथा कपड़े बाँटना) किया जाता है | इस दिन औरते दुल्हन को हल्दी (उबटन) लगाती है साथ ही एक दूसरे के साथ उबटन लगा कर खेलती है | औरते हँसी मजाक करती है ताकि मेहन्दी की रस्म खुशनुमा बन सके |

बारात वाले दिन दरवाजे पर बारात रोकना :-

दूल्हे के घरवाले बारात लेकर जब दुल्हन के घर पहुंचते हैं, तो उन्हें अंदर आने से रोका जाता है , इस रस्म को दीगाना रुकाई कहते है | इस दिन दुल्हन के छोटे भाई-बहन नेक लेकर ही बारात को अंदर आने देते है | उसके बाद लड़के के वालिद तथा लड़की के वालिद एक दूसरे के गले लगकर एक दूसरे का स्वागत तथा मुबारक बाद देते है | इस दिन दुल्हन के  वालिद की तरफ से दूल्हे के रिश्ते दारों को दावत दी जाती है | इस दिन उनकी बहुत अच्छे से मेहमान-नवाजी की जाती है। इस दिन दुल्हन के घर काफी चहल पहल रहती है और साथ ही बहुत सरे मेहमान उनके यहाँ इकट्टे होते है |

निकाह :-

निकाह या तो मस्जिद में या फिर दूल्हे-दुल्हन में से किसी एक के घर सहुलियत (आसानी) से किया जा सकता है| निकाह में एक वकील और दूल्हे-दुल्हन की तरफ से तीन-चार गवाह होते है जो इस बात का सबुत देते है की उनकी शादी एक दूसरे से हुई है | निकाह में काजी कुरान सरीफ पढता है और निकाहनामे पर दस्तखत करते है और उन दस्तखत को खुदवा देते है कि दूल्हा-दुल्हन अपनी मर्जी से निकाह कबूल कर रहे हैं। निकाह में एक जरुरी दस्तावेज होता है जिस पर दूल्हा-दुल्हन के अलावा काजी, वकील,तीन-चार गवाहो के दस्तखत होते है और फिर शादी के कागजात को सील कर दिया जाता है | यह दस्तावेज निकाह के बाद काजी के पास जमा करवा दिया जाता है | शरीयत (शराफत) में दुल्हन वालो से देहज मांगना जायज नहीं है , शरीयत के अनुसार ही मेहर तैयार किया जाता है | मेहर उस रकम को कहते है जो दूल्हे की तरफ से दुल्हन को दी जाती है ; मेहर को तब अदा किया जाता है जब दुल्हन की पूरी मर्जी हो वह चाहे तो मेहर ले या फिर उसे माफ़ कर दे, इस पर पुरी तरह से दुल्हन का हक़ होता है|

दुल्हन को रुखसत :-

निकाह के बाद दुल्हन को नए वस्त्र पहनाकर तथा उसको अच्छे से सजाते है ताकि वो बहुत सुन्दर दिखे फिर उसे रुखसत (विदा) किया जाता है | रुखसत से पहले लड़की अपने से बड़ों को सलाम करती है उस के बाद रुखसत किया जाता है | जब दुल्हन दूल्हे के साथ दूल्हे के घर पहुँचती है तो दूल्हे के घर वाले दुल्हन का बहुत अच्छे से स्वागत  करते है | दुल्हन को बहुत सारी दुआए और शूभ कामनाये भी देते है | दुल्हन के वहां पहुंचने के बाद दूल्हे की तरफ से वालीमा (दावत) कि जाती है | जिसमे दोनों ही तरफ के रिस्तेदार शामिल होते है , वलीमे के दिन दुल्हा दुल्हन अपने से बड़ो को सलाम (अस्सलावाले कुमं कह) कर उनसे आशीर्वाद लेते है | दुल्हन के आने की ख़ुशी में दूल्हे को वलीमा करना जरुरी होता है | निकाह के चौथे दिन दुल्हन आपने माता पिता के घर जाती है तब दूल्हा दुल्हन को लेने जाता है | जब दूल्हा दुल्हन के घर जाता है तो दुल्हन के छोटे भाई बहन दूल्हे के जुते चुराते है और अपनी नेक (पैसे) लेकर ही जुते वापस करते है |

Top